Saturday, 9 February 2013

ऐ मेरे शास्ता



Sudheer Maurya
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ऐ  मेरे शास्ता    
तुझे प्रणाम 
इसलिए नहीं 
की तू शास्ता है मेरा 

अपितु इसलिए 
की  तूने 
प्रकाश दिखाया है 
मेरे अँधेरे 
जीवन को          
   
सुधीर मौर्य 'सुधीर'
गंज जलालाब्द उन्नाव 
209869    

Wednesday, 6 February 2013

ओ ! गंगा के किनारे मेरे नाम का घर बनाने वाली लड़की..



Sudheer Maurya 'Sudheer' 
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हाँ 
में नहीं जनता उसे 
कभी मिला भी नहीं 
पर उसकी सूरत 
जाने क्यों 
तुमसे मिलती है।

! गंगा के किनारे 
मेरे नाम का 
घर बनाने वाली लड़की 
कभी 
लहरों पे आके देख 
मेने कश्ती पे
तुम्हारे दुपट्टे का 
बादबान बांधा  है।

तूं एक लड़की का 
जिस्म नहीं मेरे लिए 
जिसमे, में डूबू या उतराऊं 
तूं मेरा ही बदन है 
क्योंकि बसाया है 
मेने तुझे 
अपने रूह की 
अन्नंत गहराइयों में।

हाँ मे 
जनता नहीं तुझे,
हाँ 
में जनता हूं  
लड़की !
तेरी आँखों में 
मेरी चाहत का 
समुन्दर बसा है।  


सुधीर  मौर्य 
गंज जलालाबाद, उन्नाव 
209869  



Friday, 1 February 2013

मिया मिट्ठू - दुसरा यजीद


Sudheer Maurya 'Sudheer'
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Miya Mitthu (2nd Yazeed)

कभी मेने सआदत हसन मंटो कि एक कहानी पड़ी थी 'यजीदजिसमे मंटो यजीद की खोज करते दिखाई पड़ते है। बेचारे यजीद के रूप में सही पात्र  पाकर कहानी को खीचते रहते है। कभी भारत के तत्कालीन प्रधान मंत्री श्री नेहरु में  उन्हें यजीद दिखाई पड़ता है कभी किसी में। आखिर में तंग आकर मंटो अपने पैदा होने वाले बच्चे का नाम यजीद रखकर कहानी से छुटकारा पाते हे।
आज अगर मंटो ये कहानी लिखते तो उन्हें यजीद की खोज नहीं करनी पड़तीवो आसानी से इसे ढूंड  लेते। हाँ रिंकल को  तड़पाने वाला कोई यजीद ही हो सकता है। मिया मिट्ठू यकीनन मंटो का यजीद है। यजीद ने तो कर्बला में सिर्फ पानी के लिए तडपाया था पर ये मिया मिट्ठू तो बेचारी लड़कियों को एक - एक सांस के लिए तडपा रहा है। न जाने कितनी मजलूम नाबालिग लड़कियां इसकी कैद में सिसक रही हे। उनके साथ बर्बरता का सलूक किया जा रहा है। मिया मिट्ठू को उसके इन पापो के लिए खुदा कभी मुआफ़ नहीं करगा।

सुधीर मौर्य 'सुधीर'
गंज जलालाबाद , उन्नाव 
209869

Tuesday, 29 January 2013

कौन कहता है ये इक्कीसवी सदी है..


Sudheer Maurya 'Sudheer'
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आज कल बलात्कारियो को क्या सजा मिलनी चाहिए, ये चर्चा बड़े जोरो पर है। जहाँ तक में मानता हूँ ये चर्चा का विषय होना ही नहीं चाहिए, बलात्कारी को हर हाल में अधिकतम सजा मिलनी ही चाहिए।
बलात्कारी, नाबालिग हो सकता है में इस बिंदु को सिरे से ही खारिज करता हु। कोई भी व्यक्ति जब वो किसी से जबरन सेक्स करता है तो ये क्रिया उसकी पूर्ण वयस्कता को दर्शाती है।     
अगर बलात्कारी को नाबालिग समझ कर सजा में रियायत दी जाती है, तो क्या ये इस बात का सूचक नहीं है की जिन नाबालिग लडकियों के साथ बलात्कार हुआ, उनके बलात्कारी और भी अधिक सज़ा के हक़दार हे।
पकिस्तान में 6 साल की लड़की वैजन्ती के साथ हुए बलात्कार को हम किस श्रेणी मे रखेंगे। उसके अपराधियों को अधिकतम सज़ा क्या नहीं मिलनी चाहिए। बलात्कार तो बलात्कार है वो किसी के भी साथ हुआ हो, पर एक 6 साल की बच्ची के साथ हुए बलात्कार को हैवानियत ही  माना जायेगा।
अगर कानून, नाबालिग बलात्कारी की सजा में रियायत बख्शता है, तो क्या उस कानून को नाबालिग के साथ हुए बलात्कार करने वाले को तुरंत 
ज्यादा से ज्यादा सज़ा नहीं देनी चाहिए।
रिंकल कुमारी और वेयाजंती के उदहारण हमारे सामने है इन नाबालिग लड़कियों के बलात्कारी खुला घूम रहे हैं किसी और को अपना शिकार बनाने के लिए। हम चुप है, सरकार और कानून चुप हे, अंतररास्ट्रीय मानवाधिकार चुप है, ये बहुत है बलात्कारियों का हौसला बढाने के लिए। सच तो ये है इन शर्मनाक घटनाओं को   रोकने के लिए विश्व्यापी पहल की जरुरत है।
आओ हम सब मिलकर लड़कियों पर हो रहे सेक्स आत्याचार के खिलाफ आवाज़ उठाये। नहीं तो न जाने कितनी रिंकल, दामनी और वेय्जंती सिसकती रहेगी और इनके अपराधी खुला घूमते रहेगे। किसी और पर अत्याचार करने के लिए।

सुधीर मौर्य 'सुधीर'
गंज जलालाबाद, उन्नाव 
भारत 
209869             

         

Friday, 25 January 2013

समाज और स्त्रियों का जबरन अपहरण..


Sudheer Maurya 'Sudheer'
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संसार का निर्माण होते ही शायद स्त्रियों को पुरषों का गुलाम समझा जाने लगा।एक ही स्थान से, एक ही प्रक्रिया से पैदा होने के बावजूद उन्हें कभी भी पुरषों के समकक्ष स्थान  प्राप्त न हो सका।    

भारतीय संस्क्रीत में स्त्रियों को माँ , बहन और बेटी के रूप में पूजनीय माना गया है। पर  पत्नी के रूप उसे कभी भी पुरषों ने अपने बराबर नही स्वीकारा। पुरषों में बहुपत्नी रखने का चलन रहा और उनकी कई पत्निया के साथ - साथ कई - कई रखेले भी होती थी। सामन्ती पुरष पराई स्त्रियों का हरण करके उनका बलात्कार करते और फिर उन्हें अपने रनिवास योनि सुख की प्राप्ति के लिए रख लेते। भारत में मुस्लिम आकर्मण के साथ ही स्त्रियों और लडकियों के अपहरण और उन्हें रखेल बनाने के आंकड़े में बहुत तेजी से इजाफा हुआ।

स्त्र्यियो को पुब्लिक प्लेस पर भी काफी समय पहले से अपमानित किया जाता रहा है। द्रौपदी इसका ज्वलंत उदहारण है। ये बात अलग है वो अपने एक मित्र कृष्ण की मदद से बच  गई। वरना पुब्लिक प्लेस पर अपने परिवार के तमाम लोगो की मौजूदगी में ही उसका सामूहिक बलात्कार होना तय था। हा ये बात अलग है की बाद में द्रौपदी के परिवार वालो ने उसके अपमान का बदला कुरुक्षेत्र की ज़मीन को लाल करके लिया।

लगभग द्रौपदी के काल में ही, उससे कुछ वर्ष पहले ही अम्बा नाम की एक राजकुमारी का भी अपहरण करके उसे अपमानित किया गया। उसका बलात्कार तो नहीं हुआ पर जबरन अपहरण की पीड़ा वो सारी उम्र झेलती रही। इस जबरन अपहरण की वजह से उसका पुरुष मित्र उसे छोर कर चला गया।    

इन सब घटनाओं से पहले सीता के अपहरण की घटना तो सबको ज्ञात ही है। उन्हें भी इस जबरन अपहरण का दंश सारी उम्र झेलना पडा और वो कभी भी सुखी जीवन न जी सकी।

जेसा की ऊपर मेने लिखा की भारत में मुस्लिम आकर्मण के साथ ही लडकियों के अपहरण में बड़ी तेजी आई। मुस्लिम लोगो को दुसरे की स्त्रियों और क्वारी लडकियों को अपनी पत्नी या रखेल बनाने में एक विशेष सुख हासिल होता था। अल्लुद्दीन ने गुजरात की रानी कमला देवी और वह की राजकुमारी देवल देवी को जबरन अपने हरम में रखा। और उन्हें योनि दासी के रूप में भोगा। ये बात अलग है की राजकुमारी देवल देवी ने कुछ समय बाद ही अपने इस अपमान का बदला अल्लुद्दीन के सरे परिवार को ख़त्म करके ले लिया। चित्तोड़ की रानी पद्मनी को अलाउद्दीन के हाथो अपहरण होने से बचने के लिए आत्महत्या करनी पड़ी।

 अकबर ने अपने और अपने शहजादों के लिए हिन्दू पत्निया संधि में प्राप्त की पर कभी भी अपने घर की किसी लड़की की शादी उसने किसी हिन्दू राजकुमार से नहीं की। ये बात अलग है की कुछ समय बाद इस मुगुल खानदान की शहजादियो की अस्मत, अफगान आक्र्मंकारियो और अंग्रेजो ने तार - तार कर दी। 

आज हम कहने को सभ्य समाज में जी रहे है पर पिछले साल पाकिस्तान के सिंध प्रान्त में हुए एक हिन्दू लड़की रिंकल कुमारी के जबरन अपहरण ने हमे हिला के रख  दिया। रिंकल चीख -  चीख के अपने माँ - बाप के सतह जाने की गुहार लगाती रही पर उसकी आवाज़ को जबरन दबा दिया गया। वो आज भी एक योनि दासी का दंस झेल रही है। और न्याय की प्रतीक्षा कर रही है। पर क्या पुरुष प्रधान संसार में ये मुमकिन है। और फिर उस जगह जहाँ शिक्षा के लिए आवाज़  उठाने के लिए मलाला युसुफजई को सरफिरे गोली मार देते है।

लडकियों के जबरन अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन, जबरन विवाह और भोग की वस्तु से बचाने के लिए एक विश्व्यापी सार्थक पहल की जरुरत है। ये पहल कोन  करेगा ? शायद हम लोग। पर जल्दी। कही बहुत देर न हो जाये।

सुधीर 'मौर्य सुधीर'
गंज जलालाबाद उन्नाव 
209869         

   


Tuesday, 22 January 2013

पाकिस्तान में रुक नहीं रहा है हिन्दू लडकियों का अपहरण और जबरन धर्मपरिवर्तन



Sudheer Maurya 'Sudheer' 

इस्लामाबाद में एक हिंदू युवती के जबरन धर्म परिवर्तन के मामले में यहां एक मुस्लिम लड़के को गिरफ्तार किया गया है। लड़के ने दावा किया था कि लड़की ने इस्लाम धर्म कबूल कर उससे निकाह किया था, जबकि लड़की ने इन दावों को खारिज कर दिया।
लड़की ने सरवर सोलंगी पर उसे अगवा करने और महीनों तक बलात्कार करने का आरोप लगाया है। सिंध हाई कोर्ट के हैदराबाद सर्किट ने सोमवार को सरवर को पुलिस रिमांड में भेज दिया। जज मुनीब अख्तर ने यह फैसला सोलंगी की उस याचिका पर सुनवाई के बाद दिया जिसमें उसने दावा किया था कि इस्लाम धर्म कबूल करने से पहले वह भी हिंदू था। सोलंगी के वकील गुलाम हैदर शाह ने कहा कि तंदोजाम की 19 वर्षीय इस लड़की ने गत 20 मई को इस्लाम धर्म कबूल किया था और इस संबंध में सुबूत के तौर पर एक फर्जी प्रमाण पत्र भी जारी किया गया था।
सोमवार को सुनवाई के दौरान लड़की ने अदालत को बताया कि गत 18 मई को वह कपड़े धोने के लिए घर से निकली थी, जब सोलंगी और दो अन्य लोगों ने उसका अपहरण कर लिया। वे उसे कराची ले गए थे। मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, 'हिन्दू लड़की को एक कमरे में बंद कर दिया गया और सोलंगी ने उसके साथ बलात्कार किया। लड़की 30 जून को वहां से भाग निकली जब सोलंगी शराब लेने बाजार गया था।'

'दैनिक जागरण की एक खबर से'

सुधीर मौर्य 'सुधीर 
गंज जलालाबाद उन्नाव 
209869


Saturday, 19 January 2013

हाँ सुधीर ने तराशा है चित्रांगदा सिंह को..


इंकार फिल्म के निर्देशक सुधीर मिश्रा का कहना है कि वो जब भी अपनी फिल्म के किरदार के बारे में सोचते हैं तो उनके दिमाग में सिर्फ एक ही नाम और चेहरा आता है और वो नाम और चेहरा है बॉलीवुड की खूबसूरत एक्ट्रेस चित्रांगदा सिंह का। सुधीर का कहना है कि चित्रांगदा सिंह को सोचकर ही वो अपनी फिल्मों का कोई भी किरदार लिखते हैं। असल में सुधीर ने ऐसा तब कहा जब मीडिया ने उनसे पूछा कि वो चित्रांगदा सिंह को ही अपनी फिल्मों में मुख्य किरदार लेते हैं। ज्ञात हो कि चित्रांगदा सिंह को बॉलीवुड में लाने वाले भी सुधीर मिश्रा ही थे। सुधीर मिश्रा की फिल्म हजारों ख्वाहिशें ऐसी से ही चित्रांगदा सिंह ने बॉलीवुड में कदम रखा था और इसके बाद सुधीर की ही फिल्म ये साली जिंदगी से चित्रांगदा ने अपनी वापसी की थी। चित्रांगदा सिंह हज़रों ख्वाहिशें ऐसी फिल्म के बाद बॉलीवुड से कुछ लापता सी हो गयी थीं उन्हें अच्छे किरदार भी नहीं मिल रहे थे और वो सेकेंड लीड रोल करने के लिए बाध्य हो रही थीं। फिल्म जोकर में चित्रांगदा सिंह ने एक आइटम सॉंग किया था जो कि काफी फेमस हुआ था। इस आइटम सॉंग के बाद चित्रागंदा सिंह का बयान आया कि उन्हें इस गाने को करने पर अफसोस हो रहा है। हालांकि चित्रांगदा सिंह का मानना है कि वो बोल्ड नहीं हैं उनसे कई ज्यादा बोल्ड एक्ट्रेसेस फिल्मों में हैं। चित्रांगदा सिंह के टैलेंट पर किसी को कोई शक नहीं है लेकिन लगता है कि निर्देशक सुधीर मिश्रा को इस हॉट और बोल्ड एक्ट्रेस में कुछ ज्यादा ही टैलेंट नज़र आने लगा है? इनकार फिल्म में चित्रांगदा सिंह कुछ बोल्ड सीन दिए हैं पर  आजकल इस तरह के सीन हर फिल्म में आम बात हो गए हैं। इनकार में चित्रांगदा ने कुशल और मझी हुई अभिनेत्री का पूरा परिचय दिया है। निश्चय ही ये फिल्म चित्रांगदा के करियर में निखार लेके आयगी