Showing posts with label प्रेम. Show all posts
Showing posts with label प्रेम. Show all posts

Sunday, 25 December 2016

दिसम्बर और मुरादों के दिन - सुधीर मौर्य


देख लड़की मैं जानता हूँ
तूँ देखा करती थी कनखियों से किसी को
 अपनी छत पे टहलते हुए
हाथो में कोई खुली किताब लिए
देख लड़की मैं जानता हूँ 
तूँ कामना करती थी
मुरादों के दिन की 

दिसम्बर की कंपकपाती रात की तन्हाई में
अपनी सांवली गुदाज़ उंगलियों से
अपनी कमर से इज़ारबंद खोल के
देख लड़की तेरी कजिन ने बताया था मुझे
तूँ प्रेम करती है किसी को डर - डर के
देख लड़की आज कहता हूँ मैं तुझसे 

प्रेम कभी डर - डर के नहीं होता
या तो प्रेम होता है या नहीं होता
देख लड़की ये दिसम्बर का महीना है
और तेरे प्रेमी की आँखे सूनी हो चली है
तेरे इंतज़ार में
देख लड़की जा और जाके सजा दे
अपने प्रेमी की सूनी आँखों में प्रेम के सितारे
और हांसिल कर ले अपने मुरादों के दिन
देख लड़की कहीं देर न हो जाये
कि दिसम्बर का ये आखिरी हफ्ता है।
 --सुधीर मौर्य 

Thursday, 12 February 2015

प्रेम, ख़ुशी और स्वार्थ - सुधीर मौर्य



मैं ठुकरा सकता था 

तुम्हारा प्रेम 
ठीक वैसे ही 
जैसे कभी अर्जुन ने 
ठुकराया था 
उर्वशी का प्रेम


लड़की। 

पर तूने प्रेम कहाँ किया था 
तूने तो बनाया था 
मुझे 
आलम्बन अपने स्वार्थ का

कहो कैसे ठुकराता मै तुझे ?

जबकि तू प्रेम नहीं 
 चाहती थी ख़ुशी अपनी। 



           --सुधीर मौर्य


Wednesday, 28 January 2015

प्रेम का सलीका - सुधीर मौर्य




हमने सीखा है
सलीका प्रेम का
नदी पे
तैरते उस घड़े से
जिसे पकड़ के
पार उतरी थी
सोहनी
महिवाल से मिलने।

--सुधीर मौर्य

Thursday, 4 December 2014

अक्षर अक्षर याद - सुधीर मौर्य

उसने कहा था
एक दिन
कैसे रखोगे तुम याद मुझको
मेरे गैर होने के बाद

मै लिखता हूँ
अपनी नज़्मों में
उसका ही नाम
खामोश लफ्ज़ो में
और मेरी नज़्में
सबूत है इसका
मैं याद करता हूँ उसे
अक्षर अक्षर।
--सुधीर मौर्य


Sunday, 26 October 2014

डॉली : गुड़िया एक फरेब की - ४

नाबालिग आयु मे
कर बैठी थी वो प्यार
अंतरंग पलो मे
अपने प्रियतम को दे कर
यूरोप और अमेरिका के उदाहरण
ठहराती थी जायज सेक्स सम्बन्ध
एक दिन बोली वो अचानक
तय हो गई है उसकी शादी
उसकी जाति के
एक धनवान लडके से

अपने प्रेमी के मनुहार पे
उसका हाथ झटक कर बोली
कैसे टाले वो घर वालो का कहना
आखिर वो है
एक भारतीय लडकी.
...
सुधीर मौर्य

Sunday, 19 October 2014

डॉली: गुड़िया एक फरेब की - 3

अपनी बाहों के सहारे
झूल कर मेरे गले से
एक दिन कहा था उसने
वे करती टूट कर
प्यार मुझसे

और देखो
लहुलुहान हूं मै
उसके टूटे हुए प्यार की
किरचों से आज.
...
सुधीर

Friday, 17 October 2014

डाली: गुड़िआ एक फरेब की - 2

हर किरदार तय है
तेरी कहानी मे
तेरे लिये
खडे है कतार मे
तेरे सारे प्रेमी
हर किसी के पास 
तेरी कहानी का
कोई कोई हिस्सा है
इस कतार मे खडा है
सबसे पीछे
तेरा वो प्रेमी 
जिसे लूटा था 
तुमने कभी अंधेरी रात मे
अपना कौमार्य बेच के.
--सुधीर

Tuesday, 14 October 2014

डाली: गुड़िआ एक फरेब की...

तूं पूरी मै पूरा

आधी रात का प्यार अधूरा
मॉग कहीं सिन्दूर कहीं
सजती सुहागसेज कहीं
कभी दोस्ती वैर कभी
पति कहीं कौमार्य कही
मन मे कपट आंख मे आंसू
कितने घायल कितने बिस्मिल
तूफान कही कहीं पे साहिल
तूझे मुबारक झूठ तुम्हारा
बस इतना था साथ हमारा.
--सुधीर