दलित और आदिवासी इनकी हालत और इनकी हालत में कैसे सुधार किया जाये ये मुद्दा भारत में तो है, और बहुत से लोग इस पवित्र कार्य में लगे हुए हैं। हमें विश्वास है वो दिन दूर नहीं जब सारे भारत में दलित और आदिवासी अपने हक़ को हासिल करके समाज में बराबर के सहभागी होंगे। पर अप जानते है सरहद पार पकिस्तान में दलित और आदिवासी के उत्थान का कोई मुद्दा नहीं है। पकिस्तान के सिंध में दलित हिन्दू या सवर्ण हिन्दू होने का कोई मुद्दा नहीं है, वहाँ कोई मुद्दा है तो सिर्फ हिन्दू होना। सच कहे तो पाकिस्तान में हिन्दू होना एक अपराध है और हिन्दू लड़की के तो पाकिस्तान नरक है। हिन्दू लड़की चाहें कुआरिन हो या शादी शुदा उसकी अस्मत का कोई नहीं है, मुस्लिम जब चाहें उनका अपहरण करके उनका बलात्कार कर सकते, उनका जबरन धर्म परिवर्तन कर सकते हैं। अगर किसी लड़की ने हिम्मत दिखाके विरोध किया तो पकिस्तान कि सरकार और न्यायपालिका भी उन बलात्कारियों का साथ देती है। रिंकल कुमारी का उदहारण हैम सबके सामने है। अभी कुछ दिन पहले कल्पू कोल्ही नाम की एक शुदा दलित महिला को एपीआई जान देनी पड़ी जबकि एक लैंडलॉर्ड मोहम्मद खादिम ने उसका बलात्कार करने कि कोशिश की। किसी भी महिला कि अस्मत, इज्जत और योनि मेरी नज़र में सामान ही हैं चाहें वो दलित हो स्वर्ण हो हिन्दू, ईसाई या फिर मुस्लिम ही न हो। किसी भी औरत के साथ हुआ बलात्कार, बलात्कार ही है पर पकिस्तान में हिन्दू लड़कियों के साथ हो रहे बलात्कार और ज़बरन निकाह के मामले सिर्फ इसलिए हो रहे हैं क्योंकि वो हिन्दू हैं और उन्हें एक मुस्लिम देश में इज्जत से जीने का शायद कोई हक़ नहीं है। --सुधीर मौर्य
