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Thursday, 12 February 2015
Thursday, 4 December 2014
Thursday, 13 November 2014
गलती, भगवान और इंसान - सुधीर मौर्य
कर देता है वो,
हँस कर माफ़
उसकी सौ के बाद की भी गलतियां
आखिर वो
सादा दिल इंसान है
कोई भगवान नहीं।
--सुधीर मौर्य
हँस कर माफ़
उसकी सौ के बाद की भी गलतियां
आखिर वो
सादा दिल इंसान है
कोई भगवान नहीं।
--सुधीर मौर्य
Sunday, 26 October 2014
डॉली : गुड़िया एक फरेब की - ४
नाबालिग आयु मे
कर बैठी थी वो प्यार
अंतरंग पलो मे
अपने प्रियतम को दे कर
यूरोप और अमेरिका के उदाहरण
ठहराती थी जायज सेक्स सम्बन्ध
कर बैठी थी वो प्यार
अंतरंग पलो मे
अपने प्रियतम को दे कर
यूरोप और अमेरिका के उदाहरण
ठहराती थी जायज सेक्स सम्बन्ध
एक दिन बोली वो अचानक
तय हो गई है उसकी शादी
उसकी जाति के
एक धनवान लडके से
तय हो गई है उसकी शादी
उसकी जाति के
एक धनवान लडके से
अपने प्रेमी के मनुहार पे
उसका हाथ झटक कर बोली
कैसे टाले वो घर वालो का कहना
आखिर वो है
एक भारतीय लडकी.
...सुधीर मौर्य
उसका हाथ झटक कर बोली
कैसे टाले वो घर वालो का कहना
आखिर वो है
एक भारतीय लडकी.
...सुधीर मौर्य
Sunday, 19 October 2014
डॉली: गुड़िया एक फरेब की - 3
अपनी बाहों के सहारे
झूल कर मेरे गले से
एक दिन कहा था उसने
वे करती टूट कर
प्यार मुझसे
झूल कर मेरे गले से
एक दिन कहा था उसने
वे करती टूट कर
प्यार मुझसे
और देखो
लहुलुहान हूं मै
उसके टूटे हुए प्यार की
किरचों से आज.
...सुधीर
लहुलुहान हूं मै
उसके टूटे हुए प्यार की
किरचों से आज.
...सुधीर
Friday, 17 October 2014
डाली: गुड़िआ एक फरेब की - 2
हर किरदार तय है
तेरी कहानी मे
तेरे लिये
खडे है कतार मे
तेरे सारे प्रेमी
हर किसी के पास
तेरी कहानी का
कोई न कोई हिस्सा है
इस कतार मे खडा है
सबसे पीछे
तेरा वो प्रेमी
जिसे लूटा था
तुमने कभी अंधेरी रात मे
अपना कौमार्य बेच के.
--सुधीर
Tuesday, 14 October 2014
डाली: गुड़िआ एक फरेब की...
न तूं पूरी न मै पूरा
आधी रात का प्यार अधूरा
मॉग कहीं सिन्दूर कहीं
सजती सुहागसेज कहीं
कभी दोस्ती वैर कभी
पति कहीं कौमार्य कही
मन मे कपट आंख मे आंसू
कितने घायल कितने बिस्मिल
तूफान कही कहीं पे साहिल
तूझे मुबारक झूठ तुम्हारा
बस इतना था साथ हमारा.
--सुधीर
Sunday, 25 May 2014
Tuesday, 20 May 2014
माई लास्ट अफेयर - Sudheer Maurya
उपन्यास
की नायिका में मुझे फरनाज का अक्स दिखाई देता और मैं उपन्यास में लिखे
वर्णन के आधार पर फरनाज को अपनी प्रेमिका मान अपने ख्वाबों में रात बिस्तर
पर उसकी बजती चूड़ियों की आवाज सुता रहता। मैंने ख्वाबों में ख्यालों में अब
तक हर रात उसके सय्याल गुलाबी होठों को चूमा था। उसके बदन की उभारों और
घाटियों की सैर की थी।
ये इन उपन्यासों का और टीवी पर देखी गई फिल्मों का ही असर रहा होगा जो उस दिन मैंने उस मन्दिर के आगे बेबाक उसके हाथ को पकड़कर उसे `आई लव यू' बोल दिया।
मेरी बात सुनकर उसने अपनी बोझल पलकें झुका लीं और हया से बोली कुणाल मैं भी तुमसे मुहब्बत करती हूँ। उसका हाथ अब तक मेरे हाथ में था।
उसके इन शब्दों ने मुझे दुनिया भर की खुशी दे डाली। उस दिन हम तमाम दिन साथ रहे प्यार की बातों के साथ। सुम्बुल भी साथ भी पर वो शायद हमारे इकरारे मुहब्बत को समझ गई थी इसलिये उसके कदम हमारे कदमों से तमाम दिन थोड़ा पीछे ही रहे।
फिर शाम हम अलग हुए, समर विकेशन के बाद मिलने के वादे के साथ हाँ अगर आज की तरह कहीं अचानक मुलाकाते रोज होती रहे।
``ये मेरे पहले अफेयर की शुरुआत थी।''
ये इन उपन्यासों का और टीवी पर देखी गई फिल्मों का ही असर रहा होगा जो उस दिन मैंने उस मन्दिर के आगे बेबाक उसके हाथ को पकड़कर उसे `आई लव यू' बोल दिया।
मेरी बात सुनकर उसने अपनी बोझल पलकें झुका लीं और हया से बोली कुणाल मैं भी तुमसे मुहब्बत करती हूँ। उसका हाथ अब तक मेरे हाथ में था।
उसके इन शब्दों ने मुझे दुनिया भर की खुशी दे डाली। उस दिन हम तमाम दिन साथ रहे प्यार की बातों के साथ। सुम्बुल भी साथ भी पर वो शायद हमारे इकरारे मुहब्बत को समझ गई थी इसलिये उसके कदम हमारे कदमों से तमाम दिन थोड़ा पीछे ही रहे।
फिर शाम हम अलग हुए, समर विकेशन के बाद मिलने के वादे के साथ हाँ अगर आज की तरह कहीं अचानक मुलाकाते रोज होती रहे।
``ये मेरे पहले अफेयर की शुरुआत थी।''
Saturday, 16 November 2013
बस इतना सा फर्क था तेरी मेरी मुहब्बत में - सुधीर मौर्य
अभी तक महफूज़ हैं रखे
फाइलों में वो मेरी सब
मेरे हर एक ख़त का
दिया हुआ जवाब तेरा...
महकती डायरी मेरी
अब तलक अलमारी में रखी
जिसके पन्नों में रखा था
दिया हुआ गुलाब तेरा...
मेरे आँखों के आगे ही
तेरे सुर्ख पहिरन थे
अभी तक याद है मुझको
दूर जाना शिताब तेरा...
सबब ठुकराने का मुझको
तलाशा हर जगह मैंने
खुश्की में, दरिया में,
बातिल में, हकीक़त में.
महावर की जगह तुने
सुनहरी पायलें मांगी
कहाँ हासिल तुझे होता
ये सब मेरी मुहब्बत में.
मैंने अपना तुझे माना
तुने सपना मुझे समझा
बस इतना सा फर्क था
तेरी मेरी मुहब्बत में....
From My Poem Collection 'ho na ho'
सुधीर मौर्य 'सुधीर'
गंज जलालाबाद, उन्नाव (U.P.)
209869
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