Wednesday, 2 January 2019
Saturday, 4 August 2018
सदियों पुरानी अनार्य स्त्री (कविता) - सुधीर मौर्य
तुमने बड़ी असभ्यता से
हमें घोषित कर दिया था असभ्य
तुहारी इस घोषणा के साथ ही है
तुम बन गए थे सभ्यता के प्रतीक
और फिर हमें असभ्य बताकर
तुमने छीन लिए हमसे
हमारे ही पहाड, जंगल और ज़मीन
घोषित करके नदियों को पवित्र
तुमने प्रतिबंधित कर दिया जल छूना तक हमारे लिए
तुमने न केवल व्यंग्य कसे
हमारे रंग और देह पर
अपितु अपने मनोरंजन और सामर्थ्य प्रदर्शन के लिए
तुमने काट लिए
हमारे कान, नाक, हाथ, पाँव और स्तन
खुद को आर्यश्रेष्ठ और पुरोहित की घोषणा के साथ ही
तुम्हे मिल गया था अधिकार
हमें दासी बनाने और हमसे शैय्या सहचरी का
तुमने उजाड़ दिए छल से
हम द्रविड़ो के हँसते खेलते गढ़
तुम्हरी लिप्सा के भेंट चढ़ गए
शंबर, वृत्र , बलि और रावण से
न जाने कितने अनार्य
तुमने घोषित करके सरस्वती को देवी
छीन लिया हमसे लिखने पढ़ने का अधिकार
और बना लिया हमें
अपना जरखरीद दास सदा - सदा के लिए
और हमने भूल कर अपन यश गौरव
कबूल कर ली तुम्हारी दासता
अपने भाग्य को सोया मानकर
किन्तु सुनो !
अब हमारे सन्तानो की नींद टूट चुकी है
बस प्रतीक्षा है उनके उठ कर खड़े होने की।
--सुधीर मौर्य
Saturday, 7 July 2018
संजू (लघुकथा) - सुधीर मौर्य
उस समय मैं अपने लिखे
जा रहे उपन्यास के किसी पात्र के ध्यान में मग्न था और मेरे होठों से हाँ निकल गया
था जब उस लड़की ने मुझसे पूछा 'क्या तीन सौ से ज्यादा लड़कियों के साथ सेक्स संबंध रखने
वाले संजय दत्त को तुम अच्छा समझते हो ?'
'मेरे जवाब पर जब उसने
आँखे तरेर कर पूछा कैसे ?' तो बेध्यानी में दिए गए अपने जवाब के जवाब में मैने कहा
'ठीक वैसे ही जैसे अपने हरम मे पांच हजार स्त्रियों को जबरन रखने वाले अकबर को हम महान
कहते हैं।'
मेरे जवाब के बाद से
उस लड़की की तरेरी हुई आँखों में मुझे मरोड़ देने वाले भाव उभरे थे।
--सुधीर मौर्य
Friday, 6 July 2018
Tuesday, 9 January 2018
आनिहलवाड की राजकुमारी देवलदेवी पर आधारित उपन्यास।
मेरी स्वर्गीय मित्र निधि जैन ने मेरे उपन्यास देवलदेवी पर ये समीक्षा लिखी थी। अब जबकि इस उपन्यास का दूसरा संस्करण आया है तो मुझे निधि की कमी बहुत खल रही है।
देवलदेवी की प्रीबुकिंग अमेज़न पर शुरू है।
देवलदेवी की प्रीबुकिंग अमेज़न पर शुरू है।
फेसबुक और whatsapp पर जुड़ने के बाद से मेरा मोबाइल हाथों से छोड़ना अत्यंत दुष्कर हुआ है। घर के काम करते हुए भी बीच बीच में मोबाइल उठा कर देख ही लेती हूँ।
ऐसे में किताबें पढ़ना मेरे लिए चुनौती है। कुछ 15 दिन पहले 4 किताबें खरीदीं थीं जिनमे से अब तक बस खलील जिब्रान की ही एक कहानी पढ़ी।
ऑनलाइन बुक्स के जरिये मैंने दिसम्बर में प्रेमा,श्रीकांत दो उपन्यास और कई सारी कहानियाँ पढ़ीं..तभी दो बुक्स खरीदीं थीं गोदान और प्रेमाश्रम..गोदान तो तो दिलचस्प लगी..खत्म होने के बाद भी यही लगता रहा कि अभी और होता तो पढ़ा जाता। पर यहाँ दो महीने से प्रेमाश्रम खत्म करने की सोच रही हूँ पर नही हो पाता। वैसे भी इतनी मोटी मोटी किताबें और उपन्यास देखकर ही हाथ पाँव फूल जाते हैं मेरे
:\
ऐसे में एक लेखक महोदय मुझे इनबॉक्स में अपने एक उपन्यास की पीडीएफ फ़ाइल देते हैं
:\ और बोलते हैं पढ़कर प्रतिक्रिया दीजियेगा
:\ मन में तो आया कि कुछ बक दूँ.. पर घर आये मेहमान की इज्जत भी करनी चाहिए तो उनको बोल दिया 'जी जरूर'..फिर सोचा देखूं तो क्या है इसमें..पीडीएफ खोली #देवलदेवी दो तीन पेज नीचे आई 'उफ़ ये तो इतिहास से सम्बंधित था..'नो वे,किसी कीमत पर नही पढूंगी' सोच लिया था.. एक फ्रेंड Vivek को भी भेज दिया कि शायद ये पढ़कर प्रतिक्रिया देगा तो वो ही लिख दूंगी
:P ..
खैर शाम को fb पर कोई ख़ास नोटिफिकेशन नही थे तो सोचा थोडा नावेल देख ही लिया जाए.. आंय..ये क्या.. शुरू हुआ तो खत्म करने तक सांस भी न ली.. छोटा था रुचिकर था.. भाषा सुंदर.. कथानक ऐतिहासिक.. नायिका में ठोस नायिका वाले गुण.. जिसमे स्वधर्मपालन की जिजीविषा बचपन से ही दिखती है। मुझे बहुत पसंद आया यह उपन्यास इसलिए खत्म करने के बाद तुरंत लिख रही हूँ।
लेखक समीर ओह्ह सॉरी Sudheer Maurya को बहुत बहुत बधाई.. पहली बार किसी लेखक को मुझसे एक उपन्यास वो भी एक सिटींग में खत्म करवाने के लिए भी बधाई
Wednesday, 29 November 2017
देवलदेवी (ऐतहासिक उपन्यास) दूसरा संस्करण।
Redgrab books की नई किताब - देवलदेवी
इस उपन्यास की नायिका अन्हिलवाड़ की राजकुमारी देवलदेवी है, पर इसका कथानक खुसरोशाह के बिना पूरा नहीं हो सकता। देवलदेवी और खुसरोशाह भारतीय इतिहास के वो रोशन सितारे हैं जिन्हें हमेशा बादलों या कुहासे के पीछे रहना पड़ा। खुसरोशाह अन्हिलवाड का वो युवा था जिसने अपने पराक्रम से खिल़जी वंश को समूल उखाड़ फेंका और आन्हिलवाड़ विध्वंस का प्रतिशोध लिया।
देवलदेवी, जिसकी देह बार-बार विडम्बना की शिकार हुई, सुअवसर की प्रतीक्षा में यह विषपान करती रही, और उन्हें वो सुअवसर उपलब्ध करवाया महान सम्राट श्री धर्मदेव (नसरुद्दीन खुसरोशाह) ने।
देवलदेवी का शौर्य किसी तरह पद्मनी, दुर्गावती और लक्ष्मीबाई से कम नहीं है; और न ही खुसरोशाह का राणा प्रताप और शिवाजी से, परन्तु इतिहास ने इन महान विभूतियों को भुला दिया।
यह उपन्यास महान खुसरोशाह और देवलदेवी की स्मृतियों को पुन: स्थापित करने का सफल प्रयास है। आशा है कि इतिहास इन महान विभूतियों के साथ न्याय करेगा।
15 दिसंबर से प्री बुकिंग शुरू ....
लेखक:- सुधीर मौर्य
इस उपन्यास की नायिका अन्हिलवाड़ की राजकुमारी देवलदेवी है, पर इसका कथानक खुसरोशाह के बिना पूरा नहीं हो सकता। देवलदेवी और खुसरोशाह भारतीय इतिहास के वो रोशन सितारे हैं जिन्हें हमेशा बादलों या कुहासे के पीछे रहना पड़ा। खुसरोशाह अन्हिलवाड का वो युवा था जिसने अपने पराक्रम से खिल़जी वंश को समूल उखाड़ फेंका और आन्हिलवाड़ विध्वंस का प्रतिशोध लिया।
देवलदेवी, जिसकी देह बार-बार विडम्बना की शिकार हुई, सुअवसर की प्रतीक्षा में यह विषपान करती रही, और उन्हें वो सुअवसर उपलब्ध करवाया महान सम्राट श्री धर्मदेव (नसरुद्दीन खुसरोशाह) ने।
देवलदेवी का शौर्य किसी तरह पद्मनी, दुर्गावती और लक्ष्मीबाई से कम नहीं है; और न ही खुसरोशाह का राणा प्रताप और शिवाजी से, परन्तु इतिहास ने इन महान विभूतियों को भुला दिया।
यह उपन्यास महान खुसरोशाह और देवलदेवी की स्मृतियों को पुन: स्थापित करने का सफल प्रयास है। आशा है कि इतिहास इन महान विभूतियों के साथ न्याय करेगा।
15 दिसंबर से प्री बुकिंग शुरू ....
लेखक:- सुधीर मौर्य
Wednesday, 30 August 2017
Sweet Sixteen: Hindi Novel By Sudheer Maurya
Sweet Sixteen - Hindi Novel कहानी है एक बेहद गरीब और दलित लड़के कुणाल की जो स्नातक की पढ़ाई के लिए शहर आता है। कुणाल के पिता अपने क्षेत्र के हरिजन कोटे के विधायक के घर पे नौकर है इस वजह से कुणाल को बिधायक बिंदर के शहर में मिले खाली पड़े सरकारी आवास में रहने का अवसर मिल जाता है। इस तरह कुणाल भाग्य या दुर्भाग्य से कथित बड़े और रईस लोगो के बीच में पहुँच जाता है।
एक दिन कुणाल को अपने कमरे में किसी 'स्वीट सिक्सटीन' नाम की एक अनजान लड़की का खत मिलता है जो उससे प्यार करती है। अब कुणाल उस लड़की की तलाश बिल्डिंग केम्पस की हर लड़की में करता है और इस तरह वो संजना सचान और वाटिका पांडे नाम की नाम की लड़कियों से टकराता है /संजना अपने दोस्तों में संजू और वाटिका बंटी के नाम से मशहूर है। वक़्त की गर्दिश के चलते कुणाल, संजू और बंटी दोनों से शारीरिक सम्बन्ध बना लेता है। पर वास्तव में संजू जिसके पापा आई. ए. एस. है और बंटी जिसके पापा विधायक है वो दोनों मिसेज रंजना नाम की एक औरत के आर्गनाइजेशन में है। ये आर्गनिजशन औरतो को लड़के और मर्दो को लडकिया सप्लाई करने का काम करता है। एक साजिश के तहत बंटी और संजू, कुणाल को एक औरत मिसेज अंजलि की पास भेज देती है। अब संजम असलियत से वाक़िफ़ होता है। वो मिसेज रंजना के खिलाफ आवाज़ उठाता है। जिसे संजू, कविता के माध्यम से बेकार कर देती है।
कविता कुणाल के दूर के रिश्ते की लड़की है जो शहर में रहती है और उसे पढ़ने में मदद लुबना नाम की लड़की करती है। लुबना ही असल में वो लड़की है जो कुणाल को स्वीट सिक्सटीन नाम से खत लिखती है।
धीरे - धीरे कुणाल और लुबना नज़दीक आते है और लुबना कुणाल को संघर्ष के लिए प्रेरित करती है। कुणाल ज्यो ज्यो विद्रोह करता है मिसेज रंजना की और से दबाने की कोशिश भी तेज होती है। अब रंजना के साथ संजू और बंटी के पापा भी मिल जाते है और गाँव में कुणाल के घर में आग लगाके उसकी बहन मधु का सामूहिक बलात्कार करवाते है। कुणाल गाँव से अपनी बहन को लेकर आता है और लुबना की सहयता से अंतिम संघर्ष करता है।
--सुधीर
एक दिन कुणाल को अपने कमरे में किसी 'स्वीट सिक्सटीन' नाम की एक अनजान लड़की का खत मिलता है जो उससे प्यार करती है। अब कुणाल उस लड़की की तलाश बिल्डिंग केम्पस की हर लड़की में करता है और इस तरह वो संजना सचान और वाटिका पांडे नाम की नाम की लड़कियों से टकराता है /संजना अपने दोस्तों में संजू और वाटिका बंटी के नाम से मशहूर है। वक़्त की गर्दिश के चलते कुणाल, संजू और बंटी दोनों से शारीरिक सम्बन्ध बना लेता है। पर वास्तव में संजू जिसके पापा आई. ए. एस. है और बंटी जिसके पापा विधायक है वो दोनों मिसेज रंजना नाम की एक औरत के आर्गनाइजेशन में है। ये आर्गनिजशन औरतो को लड़के और मर्दो को लडकिया सप्लाई करने का काम करता है। एक साजिश के तहत बंटी और संजू, कुणाल को एक औरत मिसेज अंजलि की पास भेज देती है। अब संजम असलियत से वाक़िफ़ होता है। वो मिसेज रंजना के खिलाफ आवाज़ उठाता है। जिसे संजू, कविता के माध्यम से बेकार कर देती है।
कविता कुणाल के दूर के रिश्ते की लड़की है जो शहर में रहती है और उसे पढ़ने में मदद लुबना नाम की लड़की करती है। लुबना ही असल में वो लड़की है जो कुणाल को स्वीट सिक्सटीन नाम से खत लिखती है।
धीरे - धीरे कुणाल और लुबना नज़दीक आते है और लुबना कुणाल को संघर्ष के लिए प्रेरित करती है। कुणाल ज्यो ज्यो विद्रोह करता है मिसेज रंजना की और से दबाने की कोशिश भी तेज होती है। अब रंजना के साथ संजू और बंटी के पापा भी मिल जाते है और गाँव में कुणाल के घर में आग लगाके उसकी बहन मधु का सामूहिक बलात्कार करवाते है। कुणाल गाँव से अपनी बहन को लेकर आता है और लुबना की सहयता से अंतिम संघर्ष करता है।
--सुधीर
Subscribe to:
Posts (Atom)





