Saturday, 21 June 2014

बुंदेलखंड के गणपति है लाला हरदौल - सुधीर मौर्य

ओरछा के दीवान जुझार सिंह के छोटे भाई थे लाला हरदौल। सच कहूँ तो लाला हरदौल का नाम , किस्सा मैने बचपन 
में ही रंगमंच की एक विधा 'नौंटकी' से जान लिया था। जहाँ भक्त हरदौल का मंचन आम बात है। जनमानस 
पूरी रात टकटकी लगाये भक्त हरदौल में खोया रहता है। मैने भी कोई आधा दर्ज़न बार ये मंचन देखा होगा। 
बुंदेलखंड के हर गाँव - कसबे में उनके नाम पर चौतरा होता है। वही उनका पूजा स्थल होता है। लाला हरदौल को 
अपने अग्रज जुझार सिंह और भाभी पार्वती का अपार स्नेह प्राप्त था। पार्वती निसंतान थी और वह हरदौल से पुत्रवत 
स्नेह रखती थी। लाला हाइडॉल के कुछ विरोधियों ने जुझार सिंह के कान भरे, हरदौल और उनकी भाभी के बीच कु - 
सम्बन्ध है। लोगो के बार - बार उकसाने पर जुझार सिंह ने पार्वती को हरदौल को विषपान कराने की आज्ञा दे दी। 
अब रानी के लिए परीक्षा की घडी थी। एक ओर पति की आज्ञा और दूसरी ओर पुत्रवत हरदौल। अन्तता : रानी 
पार्वती ने पवित्र सम्बन्ध की रक्षा के लिए पति की आज्ञा अनुसार हरदौल को विषपान कराया। लाला हरदौल ने हँस 
कर अपने प्राणो का उत्सर्ग कर दिया। 
मृत्यु का आलिंगन करते ही लाला हरदौल अमर हो गए।
हरदौल की एक बहन थी, नाम कुंजावती। उसकी पुत्री का विवाह था। भाई के यहाँ 'भात' का निमंत्रण देने की प्रथा 
है। कुंजावती भाई के घर गई। जुझार सिंह बंधू हत्या के दोषी थे। इसलिए कुंजावती हरदौल की समाधि पर गई। मन ही 
मन भाई को आमंत्रित किया।
और फिर कुंजावती और सारे गाँव ने देखा कि लाला हरदौल की छाया विवाह की हर रस्म में उपस्थित रही। 
हरदौल खुद आये और भाई होने का कृतव्य पूरा किया। हर रस्म बिना किसी रूकावट के संपन्न हो गई।
तब से ये प्रथा चल पड़ी। किसी के भी घर में विवाह या अन्य कोई मंगल कार्य होता है तो घर की औरतें लाला 
हरदौल के चबूतरे पर जाती हैं और लोकगीत गा गा कर उन्हें आमंत्रित करती हैं। शुभ कार्य निर्विघ्न होने की प्रार्थना 
करती है।
तब से ये प्रथा चल पड़ी। किसी के भी घर में विवाह या अन्य कोई मंगल कार्य होता है तो घर की औरतें लाला 
हरदौल के चबूतरे पर जाती हैं और लोकगीत गा गा कर उन्हें आमंत्रित करती हैं। शुभ कार्य निर्विघ्न होने की प्रार्थना 
करती है। 
निर्विघ्नता, प्रेम और पवित्रता के लोकदेवता लाला हरदौल इस तरह सारे बुन्देलखण्ड में गणपति की तरह प्रथम पूज्य 
हो गए। लाला हरदौल की कथा का मंचन आज भी भक्त हरदौल के नाम से गाँव - गाँव में होता है। 


भोपाल से प्रकाशित होने वाली पत्रिका रूबरू दुनिया के जून २०१४ के अंक में प्रकशित।


सुधीर मौर्य 
गंज जलालाबाद, उन्नाव ( उ प्र )- 209869


Thursday, 12 June 2014

कश्मीरी हिन्दुओ का असुरक्षित भविष्य- सुधीर मौर्य

उमर अब्दुल्ला और  महबूबा मुफ़्ती के सरंक्षण में यदि कश्मीरी हिन्दुओ की घर वापसी हुई तो निश्चित रूप से कश्मीरी हिन्दुओ को और भी कष्ट झेलने पड़ेंगे। यदि लव जेहादी अपने मक़सद में असफल भी रहे तो वो रेप जिहाद को अपना  मकसद बनायगे और उमर अब्दुल्ला महबूबा मुफ़्ती के शासन में  जिहादियों के लिए ये सब अत्यंत आसान रहेगा और हो सकता है उमर   महबूबा की तरफ से  जिहादियों को प्रोत्साहन ही मिले।
यदि कश्मीरी हिन्दुओ को सम्मान के साथ उनकी घर वापसी करनी है
कश्मीर से 'धारा ३७०' को हटाकर उसे केंद्र शासन के अधीन लाना होगा। आखिर कब तक  कश्मीरी हिन्दू अपने ही देश सम्मान खोकर  अपनी ही ललनाओं की अस्मिता जिहादियों की भेंट चढ़ते देखते रहेंगे, कब तक वे अपने देश में अपने घरो से दूर सम्मान को तरसते रहेंगे।

कभी कोई वामपंथी बुद्धजीवी क्या अपने किसी लेख में ये विचार करेगा कि पाकिस्तान, बांग्लादेश और भारत के कश्मीर प्रान्त में हिन्दुओ की जनसख्याँ में इतनी कमी क्योंकर हुई। क्यों इन इलाकों में हिन्दू कहलाने वाले लोग सिर्फ , प्रतिशत में सिमट कर रह गए हैं।  वामपंथी बुद्धजीवी सिर्फ और सिर्फ हिरोशिमा, इराक़ और अफगानिस्तान पर गपोड़बाज़ी करते हुए पाये जाते हैं।

--सुधीर मौर्य    

Sunday, 1 June 2014

बलात्कार प्रदेश - सुधीर मौर्य

बदायूँ 
सिर्फ तूँ ही नहीं 
सारे 
उत्तर प्रदेश पे 
लग रहे हैं 
बलात्कार के दंश 
बैठे हैं 
प्रदेश के स्वामी 
सैफई महोत्सव के 
उजाले में 
सारे प्रदेश को 
अंधकार में 
डुबोकर 
नीरो की तरह 
आग के उजालो में 
बांसुरी  
बजाते  हुए। 

--सुधीर मौर्य 

आँखे - सुधीर मौर्य

न जाने क्यों 


मै जब भी 


तुम पर कविता लिखता हूँ


मेरे ख्यालो में 


तुम्हारी सहेली की आँखे 


चमक जाती है

--सुधीर मौर्य

Sunday, 25 May 2014

अधूरे फ़साने की मुक़म्मल नज़्म - सुधीर मौर्य


एक  अफ़साना 
जो मुक़म्मल न हो सका। 
ओ रात की चांदनी 
तुम कहती हो मै नज़्म लिखुँ उस पर। 
ओ सुबह की धुप 
क्या नाचना चाहती हो तुम 
 उस अधूरे फ़साने की 
मुक़म्मल नज़्म पर।   

--सुधीर मौर्य 

Tuesday, 20 May 2014

माई लास्ट अफेयर - Sudheer Maurya

उपन्यास की नायिका में मुझे फरनाज का अक्स दिखाई देता और मैं उपन्यास में लिखे वर्णन के आधार पर फरनाज को अपनी प्रेमिका मान अपने ख्वाबों में रात बिस्तर पर उसकी बजती चूड़ियों की आवाज सुता रहता। मैंने ख्वाबों में ख्यालों में अब तक हर रात उसके सय्याल गुलाबी होठों को चूमा था। उसके बदन की उभारों और घाटियों की सैर की थी।
 
ये इन उपन्यासों का और टीवी पर देखी गई फिल्मों का ही असर रहा होगा जो उस दिन मैंने उस मन्दिर के आगे बेबाक उसके हाथ को पकड़कर उसे `आई लव यू' बोल दिया।
मेरी बात सुनकर उसने अपनी बोझल पलकें झुका लीं और हया से बोली कुणाल मैं भी तुमसे मुहब्बत करती हूँ। उसका हाथ अब तक मेरे हाथ में था।
उसके इन शब्दों ने मुझे दुनिया भर की खुशी दे डाली। उस दिन हम तमाम दिन साथ रहे प्यार की बातों के साथ। सुम्बुल भी साथ भी पर वो शायद हमारे इकरारे मुहब्बत को समझ गई थी इसलिये उसके कदम हमारे कदमों से तमाम दिन थोड़ा पीछे ही रहे।
फिर शाम हम अलग हुए, समर विकेशन के बाद मिलने के वादे के साथ हाँ अगर आज की तरह कहीं अचानक मुलाकाते रोज होती रहे।
``ये मेरे पहले अफेयर की शुरुआत थी।''

Wednesday, 2 April 2014

बेसबब तूं आसरा देखे - सुधीर मौर्य


मै पथ्थर हो चूका हूँ, बेसबब तूं आसरा देखे 
तेरी हसरत अधूरी है मुझे तूं टूटता देखे 

किसी की ज़िन्दगी उनसे अधिक खुशहाल कैसे है 
बहुत से लोग हमने इसलिए भी गमजदा देखे 

मुझे साहिल मिला तो वो बहुत मायूस रहता है 
वही जिस सख्स की ख्वाहिस थी मुझे डूबता देखे