Tuesday, 20 May 2014

माई लास्ट अफेयर - Sudheer Maurya

उपन्यास की नायिका में मुझे फरनाज का अक्स दिखाई देता और मैं उपन्यास में लिखे वर्णन के आधार पर फरनाज को अपनी प्रेमिका मान अपने ख्वाबों में रात बिस्तर पर उसकी बजती चूड़ियों की आवाज सुता रहता। मैंने ख्वाबों में ख्यालों में अब तक हर रात उसके सय्याल गुलाबी होठों को चूमा था। उसके बदन की उभारों और घाटियों की सैर की थी।
 
ये इन उपन्यासों का और टीवी पर देखी गई फिल्मों का ही असर रहा होगा जो उस दिन मैंने उस मन्दिर के आगे बेबाक उसके हाथ को पकड़कर उसे `आई लव यू' बोल दिया।
मेरी बात सुनकर उसने अपनी बोझल पलकें झुका लीं और हया से बोली कुणाल मैं भी तुमसे मुहब्बत करती हूँ। उसका हाथ अब तक मेरे हाथ में था।
उसके इन शब्दों ने मुझे दुनिया भर की खुशी दे डाली। उस दिन हम तमाम दिन साथ रहे प्यार की बातों के साथ। सुम्बुल भी साथ भी पर वो शायद हमारे इकरारे मुहब्बत को समझ गई थी इसलिये उसके कदम हमारे कदमों से तमाम दिन थोड़ा पीछे ही रहे।
फिर शाम हम अलग हुए, समर विकेशन के बाद मिलने के वादे के साथ हाँ अगर आज की तरह कहीं अचानक मुलाकाते रोज होती रहे।
``ये मेरे पहले अफेयर की शुरुआत थी।''

Wednesday, 2 April 2014

बेसबब तूं आसरा देखे - सुधीर मौर्य


मै पथ्थर हो चूका हूँ, बेसबब तूं आसरा देखे 
तेरी हसरत अधूरी है मुझे तूं टूटता देखे 

किसी की ज़िन्दगी उनसे अधिक खुशहाल कैसे है 
बहुत से लोग हमने इसलिए भी गमजदा देखे 

मुझे साहिल मिला तो वो बहुत मायूस रहता है 
वही जिस सख्स की ख्वाहिस थी मुझे डूबता देखे 

Friday, 28 March 2014

जल्दी करो (लघुकथा) - सुधीर मौर्य

जल्दबाजी में इकरा बचते-बचाते गैर मजहब इलाके में गयी। धार्मिक नारे लगते लोग उसकी तरफ बढे,  इकरा सूखे पत्ते की तरह कांपने लगी। किसी तरह आरती उसे उन्मादियों से बचा कर अपने घर लायी और कुछ दिन अपने मजहब की तरह कपडे पहनने को कहा।
दुसरे मजहब के लोग अल्लाह हो अकबर के नारे लगाते  मोहल्ले में बदला लेने की गरज से घुसे, जो मर्द सामने काट डाला और लड़कियों की अस्मत लूटने लगे।
इकरा भी उनके हत्थे चढ़ी, बेचारी रो-रो कर अल्लाह की दुहाई देती रही कि वो उनके मजहब की है। पर वो ये कहते हुए, साली बचने के लिए बहाना करती है, उस पर टूट पड़े।
इकरा का भाई लूट-पाट करता उसी घर में घुसा और बहन को अपने ही मजहबियों से लूटते देख अवाक रह गया।

भाई को देख कर कराहती हुई इकरा के होठो पर एक फीकी मुस्कान उभरी। फिर वो अपने ऊपर लेटे बलात्कारी से बोली ''जल्दी  करो'' आपका एक साथी और गया है।                  -----सुधीर मौर्य 

Friday, 21 March 2014

सबसे खुबसूरत पल - सुधीर मौर्य

! प्रियतमे 
हमारी जिन्दगी का 
सब से खूबसूरत पल 
हमारे इंतजार में
बेकरार है वहां 
जहाँ पे 
फलक और जमी  
आलिंगनबद्ध 
होते हैं।

 फ़लक़ - जमीं का 
मिलन 
कोई मारिच्का नहीं है 
वह तो 
शास्वत सत्य है 
जिन्हें हम 
दूर की नज़र से 
देख सकते हैं
किन्तु नजदीक से नहीं।

क्यों
क्योंकि यह मिलन 
अदेहिक है,
रूहों का है।

अरे ! प्रियतमे 
सही देहिक 
हम आत्माओ से मिले है 
जिसे 
दुनिया देख नहीं सकती।  


Saturday, 15 February 2014

'देवलदेवी: एक संघर्षगाथा

दोस्तों मेरा ऐतहासिक उपन्यास 'देवलदेवी: एक संघर्षगाथा' दिल्ली पुस्तक मेला में साहित्य संचय प्रकाशन के हाल न . 18 स्टैंड - S 1/15पर उपलब्ध है। आप उपन्यास के लिए इन न . 9871418244 / 9136175560 पर सम्पर्क कर सकते हैं।

Thursday, 30 January 2014

जब नारदजी सम्मानित हुए - सुधीर मौर्य

युग पे युग बदल गए पर अपने नारद भाई जस के तस। रत्ती - मासा भी बदलाव नहीं हाथ में तानपूरा होठों पे नारायन - नारायन और वही खबरनवीसी का काम। जाने कहाँ से टहलते- घूमते आपके चरन भारत मैया की धरती पर आ टिके। तनिक देर में ही नारायनी शक्ति के बल पर आपने खबरनवीसी के हायटेक टेक्नोलोजी की महत्ता समझ ली। इस टेक्नोलोजी की महत्ता से घबराकर बेचारे पतली गली ढूंढ ही रहे थे कि एक उपकरणों से लैस पत्रकार के हाथो धरे गये। देखते ही पत्रकार मुस्कराकर बोला क्या हल है तानपुरा मास्टर? बेचारे नारद जी पत्रकार की स्टाइल से सिटपिटा गए। सम्हल के बोले! अरे बोलने की गरिमा रखो। गरिमा को बांधो कंधे पे पड़े अंगोछे में मिस्टर जानते नहीं हमारे सर पे किसका हाथ है। अब तो नारद और सिटपिटाये, सोचा कहीं इसने भोले की भक्ति करके कोई वरदान - सरदान का मालिक न बन बैठा हो। डरते - सहमते पूछा किसका हाथ है आपके सर पे ? २मिमी के मूछ के बाल को सहलाते हुए बोला पत्रकार दिल्ली की नई नवेली सरकार का। दिल्ली का नाम सुनकर नारद जी की बची - खुची हवा भी निकल गई। भागने की जुगत में बोले अच्छा चलता हूँ। पर पत्रकार तो अपने नशे में था, इसी नशे में डोलता बोला अरे यहाँ आये हो तो कुछ मांग लो। बेचारे नारद जी पिंड छुड़ाने की गरज़ से बोले अब क्या मांगू साहब आप तो महाज्ञानी है जो उचित समझे दे दे। नारद की बात सुनकर वो तनिक सोचकर बोला! कुछ भी, तुमने खबरनवीसी का काम किया सो आप हमारी बिरादरी के ठहरे इसलिए हम आपको पत्रकारिता का आशुतोष सम्मान प्रदान करते है।                                                                                                                                                                           शाल , प्रशस्ति पत्र और नोटों का लिफाफा लेकर नारद जी अभी खिसके ही थे कि पीछे से फिर आवाज़ आई, अरे सुनते जाव| बेचारे नारद जी ठिठक के पलटे और मुह खोल के सवालिया अंदाज़ में खड़े हो गये। अरे भाई हम आपकी तरह और लोगो को सम्मानित करना चाहते हैं जिनकी अब तक किसी ने खबर नहीं ली। कौन है वो खुशनसीब नारद जी नोटों का लिफाफा कमर में खोंसते हुए बोले। अरे भई अपने हरिश्चंद्र महाराज को ईमानदारी का अरविन्द पुरस्कार, कालिदास को  विश्वास सम्मान और… पत्रकार और भी कई नाम गिना रहा था और अपने नारद मुनि सर पर पैर रखकर भाग रहे थे। 

सुधीर मौर्य

गंज जलालाबाद ,

उन्नाव (यू पी ) 209869


Wednesday, 29 January 2014

पाकिस्तान में एक लड़की और जबरन अगुवा

पाकिस्तान में  लड़कियों को अगुवा करके उनका जबरन धर्मान्तरण का सिलसिला बदस्तूर जारी है। रिंकल कुमारी से लेकर लिली भील तक न जाने कितनी कहानिया सामने आ चुकी हैं, जिन्हे न्याय नहीं मिला। अपहरण की हुई ये लड़कियां लौट कर कभी अपने घर नहीं आई। अपहरणकर्ता लड़कियो को जबरन उठाकर बड़ी आसानी से उन्हें इस्लाम कबूल करने को मज़बूर कर देते हैं। ऐसी ही एक कहानी 16 जनवरी को घटित हुई जब पाकिस्तान के जिला संघार - सिंध से पूजा नाम की लड़की का अपहरण करके उसका धर्मपरिवर्तन किया गया। पूजा के भाई दिलीप के अनुसार पूजा का निकाह शायद 19 जनवरी को हो गया है।