Monday, 13 April 2015

आइएसआइएस आतंकी और ९ साल की बच्ची - सुधीर मौर्य

आइएसआइएस आतंकियों ने दरिंदगी की सारी हदें पार कर दी है। बताया गया है कि उत्तरी इराक में आइएस के आतंकियों ने नौ वर्ष की एक लड़की को गुलाम बनाया, फिर दस आतंकियों ने उसके साथ रेप कर नाबालिग बच्ची को प्रेगनेंट कर दिया।
पीड़ित यजदी लड़की दरिंदे आतंकियों के चंगुल में लगभग एक साल फंसी रही। इस यजदी लड़की के साथ वहां कई अल्पसंख्यक महिलाएं और लड़कियों को यौन गुलाम के तौर पर बंधक बनाकर रखा गया था। गौरतलब है कि कुछ हफ्तों पहले लगभग 200 महिलाओं और लड़कियों को इन आतंकियों के चंगुल से मुक्त कराया गया। पिछले साल जून में आइएस आतंकियों ने इन्हें बंधक बना लिया था।
यजदी गांव पर हमला कर आतंकियों द्वारा बंधक बनाए गए हजारों लोगों में से लगभग 100 लोग उनके चंगुल से निकलने में सफल रहे इनमें नौ साल की पीड़ित लड़की भी शामिल थी। एक अंग्रेजी अखबार के मुताबिक फिलहाल नौ साल की पीड़ित लड़की को जर्मनी के कुर्दिश संस्थान ने अपने संरक्षण में ले लिया है और उसकी देखरेख कर रही है।
--सुधीर मौर्य 

Tuesday, 7 April 2015

एक वामपंथी की कलम - सुधीर मौर्य

उसे सरोकार नहीं होता
कश्मीर में बेघर हुए
हिन्दुओ के दर्द से
वो तो बस छटपटाती है
अफज़ल के नाम पर
वो कलम है एक वामपंथी की।


हज़ार सालो में
मज़हब के नाम पर
लाखो मंदिरो का
गिराये  जाना
जायज है उसकी नज़र में
और नायजायज है
राममंदिर का बनाये जाना
वो एक वामपंथी की कलम है। 

सुख जाती है
उसके पेट की स्याही
पाकिस्तान और बांग्लादेश में
हो रहे अल्पसंख्यको के अत्याचार
और उनकी लड़कियों के
बलात्कार के नाम पर
और लिखती है लाल सलाम
भारत के खुशहाल अल्पसंखको का
छद्म दर्द  गढ़ कर।
वो कलम है एक वामपंथी की।

वो कलम है एक वामपंथी की।


--  सुधीर मौर्य

Saturday, 4 April 2015

इस्लामी आतंकवाद का खतरा

सेमेटिक धर्मो में जहाँ यीशु ने प्रभू और धर्म के नाम पर शांति का सन्देश दिया। वहीँ मुहम्मद ने इस्लाम और क़ुरान के नाम पर सारे संसार को ऐसे फसाद में झोंक दिया जहा रोज़ मजहब के नाम पर कत्लेआम का खेल खेला जा रहा है। अभी पाकिस्तान में बच्चो की चीखे शांत भी न हुई थी कि केन्या में १५० बच्चो की जाने अल शबाब नाम के अातंकवादी संगठन ने ले ली। इस संगठन ने मज़हब के नाम पे १५० ईसाई बच्चो को मार दिया।
इस्लामी आतंकवाद से इस्लाम के  अतिरिक्त अन्य सेमेटिक जातियों (ईसाई और यहूदी ) को वापस क्रूसेड के झंडे के नीचे आना होगा। नहीं तो इस्लाम मज़हब के नाम पर उनकी नस्लों को यूँ ही ख़त्म करता रहेगा।
गैर सेमेटिक जातियां (हिन्दू, पारसी) आदि को अपने धर्म और नस्लों की रक्षा के लिए धर्मयुद्ध का ध्वज उठाना ही पड़ेगा।
कुछ भी कर लो इस्लामिक चरमपंथी संगठन अब शांति की भाषा सुनने वाले नहीं। इनमे उनकी गलती भी नहीं उनकी मज़हबी शिक्षा, शांति नहीं बल्कि मार काट पर आधारित है।  एक कट्टर मजहबी मुस्लमान कभी भी शांति की राह पर न चल सकता है।  और न ही उस पर कभी कोई शांति का उपदेश असर डाल सकता है।
अब अन्य धर्म को सोचना होगा कि वो किस तरह बढ़  रहे इस्लामिक कट्टरवाद पर नकेल कसे।  विकल्प शायद गोली का उत्तर गोली से देने का है
--सुधीर   मौर्य             

Friday, 3 April 2015

मैं तो बस करता था प्रेम - सुधीर मौर्य

मैने किया था इश्क़ 
कबूल करता करता हूँ मै 
मैने भी तोड़े थे 
चाँद तारे तेरे लिए 
ख्यालो में ही सही 
मैने भी लिखे थे प्रेम पत्र 
खून की जगह स्याही से 
क्योंकि मै जनता हूँ 
चाँद तारे मेरी मिलकियत नहीं 
और खून मेरा होकर भी 
सिर्फ मेरा तो नहीं। 
मैं नहीं करना चाहता 
आकाश को सूना, चाँद - तारो के बिना 
नहीं बहाना चाहता 
रक्त की एक भी बूँद 
प्रेम और जंग, किसी भी नाम पर

मैं तो बस करता था प्रेम 
मैं अब भी करता हूँ 
और करता रहूँगा तुमसे प्रेम 
जबकि मैं जनता हूँ 
तुम्हे चाँद - तारे चाहिए 
और तुम निकल गए 
बहुत दूर 
चाँद - तारो के लिए 
ठुकरा कर प्रेम की स्याही। 
--
सुधीर

Thursday, 2 April 2015

प्रेम, प्रेयसी और प्रणय निवेदन - सुधीर मौर्य


नहीं नहीं
मेरा ख्वाब डूबने का नहीं 
बल्कि मैं तैरना चाहता हूँ 
तुम्हारी एक इंच की 
नाव जैसी आँखों में

नहीं नहीं 
मैं नहीं पीना चाहता 
तुम्हारे चॉकलेटी होठो का रस 
अपने होठो से 
मैं तो चाहता हूँ महसूस करना 
अपनी उंगलियो की पोरों से 
तुम्हारे लरजते होठो की सिहरन
नहीं नहीं 
मैं नहीं हांसिल करना चाहता 
तुम्हारा गुदाज जिस्म 
मैं तो चाहता हूँ 
तुम्हारे देह की गर्मी 
अपनी उदास रातो के लिए
कहो प्रिये !
तुम भी अपनी मन की कहो 
फिर न कहना कि,
ये समाज पुरुषो का है 
जहाँ स्त्री अपनी बात कह नहीं सकती।
मैं जनता हूँ 
तुम करना चाहती हो 
प्रणय निवेदन मुझसे 
फिर इस फागुन की बयार में 
खोल दो दिल की गिरह।
--सुधीर


Wednesday, 1 April 2015

नज़्म, अफ़साना और प्रेयसी - सुधीर मौर्य

कई बार सोचा मैने
मैं कोई नज़्म लिक्खूँ
तेरी एक इंच की
नाव सी आँखों पे
कई बार मैने कलम उठाई
तेरे लरज़ते होठों पर
कोई अफ़साना लिखने के लिए
और हर बार मैं नाकाम रहा
क्योंकि मैं जब भी
कुछ लिखता हूँ तुम पर
ओ मेरी प्रेयसि !
तुम्हारे स्तन, कमर, नितम्ब,जांघे
और थरथराती पिंडलियाँ
तारी रहती हैं
मेरे होशो हवास पर।

--सुधीर

Thursday, 12 February 2015

प्रेम, ख़ुशी और स्वार्थ - सुधीर मौर्य



मैं ठुकरा सकता था 

तुम्हारा प्रेम 
ठीक वैसे ही 
जैसे कभी अर्जुन ने 
ठुकराया था 
उर्वशी का प्रेम


ओ लड़की। 

पर तूने प्रेम कहाँ किया था 
तूने तो बनाया था 
मुझे 
आलम्बन अपने स्वार्थ का

कहो कैसे ठुकराता मै तुझे ?

जबकि तू प्रेम नहीं 
 चाहती थी ख़ुशी अपनी। 



           --सुधीर मौर्य