Wednesday, 6 May 2015

नाम - सुधीर मौर्य

तुम्हारा और मेरा नाम 
अभी लिखा है
गाव से सटे जंगलो में 
दरख्तों के तनो पर 
बहती हुई नहर पर बने 
बांध की दीवार पर 
और हर उस जगह 
जहाँ हम कभी साथ - साथ थे 
जानती हो ? मेरे मन पे
अब भी तुम्हारा नाम लिखा है
जबकि मै जानता हूँ 
तुम्हारे मन पे अब मेरा नाम नहीं। 

--सुधीर मौर्य

8 comments:

  1. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 7 - 5 - 2015 को चर्चा मंच पर चर्चा - 1968 में दिया जाएगा
    धन्यवाद

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (08-05-2015) को "गूगल ब्लॉगर में आयी समस्या लाखों ब्लॉग ख़तरे में" {चर्चा अंक - 1969} पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक
    ---------------

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  3. मन छूने वाली रचना

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