Thursday, 14 March 2013

बांग्लादेश के हिन्दू भी इंसान ही तो है


Sudheer Maurya
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सन 1971  में पूर्वी बंगाल को पकिस्तान के आत्याचार से मुक्ति दिलाने के लिए वहां के हिन्दुओ ने स्फूर्तिदायक स्वतंत्रता युद्ध लड़ा, आजदी मिली पर उन पर होते आत्याचार आज भी कम हुए।
बंगला देश के उसी स्वतंत्रता संग्राम में कट्टरपंथी दिलावर हुसैन सईदी ने हिन्दुओ को लक्ष्य करके उनकी  स्त्रियों के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया और करवाया। वो जमाते इस्लामी का नेता है। पिछली 28 फ़रवरी को उसे 1971 में नरसंहार और दुष्कर्म करने के अपराध में फासी की सज़ा सुनाई गई। बस उसके बाद लगभग साडे पंद्रह करोड़ की आबादी वाले बांग्लादेश जिसमे दस फीसदी हिन्दू रहते हैं उन पर मुस्लिम कट्टरपंथी टूट पड़े। जाने कितने हिन्दुओ को मौत की घाट उतार दिया गया, उनकी लडकियों के साथ बलात्कार किया गया।  जाने कितने देवालय और मंदिर तोड़ दिए गये, जला दिए गए।
ये वही जमाते इस्लामी के राक्षस है जिन पर पाकिस्तानी सेना के साथ मिलकर साजिश रचने के आरोप हैं। ख़ैर पकिस्तान के बारे में तो बात करना ही बेकार है वहाँ रह रहे ( बचे हुए एक या डेड़ पर्तिशत) उनकी हालत तो और भी बदतर है। पर भारत सरकार भी अपने पडोसी देशो में हिन्दुओ पर हो रहे अत्याचार पर खामोश है, ये बहुत दुःख की बात है। 
हम जब तक खामोश रहेंगे पकिस्तान और बांग्लादेश में इंसानियत का क़त्ल होता रहेगा। भारत को अपनी ख़ामोशी तोडनी होगी और  अमेरिका की तरह पकिस्तान में घुस कर ओसामा जैसे लोगो को सबक सिखाना होगा। 

1 comment:

  1. dekho bura kam attiyachar chahe kisi ke bhe sath ho koi acha nahi kahega dekho sare muslman ek se nahi hote sab ko ek tarazu me tolna galat hai pancho ungli ek sath nahi hoti aur rahi bat pakistan ke wahan bhi ek state esa hai jahan attiyachar hote hai warna pur sakun hai me muslmano ke taraf se nahi keh raha hu sirf insaniat ke nate tum ko ye mashwarah de raha hu ke bina kesi mazhab ke jane bolna galat hai me ye nahi kehta hindu mazhab galat hai islam aur sanatan dharan wed aur quraan me siwae bhasha ke koi antar nahi hai

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