Wednesday, 2 April 2014

बेसबब तूं आसरा देखे - सुधीर मौर्य


मै पथ्थर हो चूका हूँ, बेसबब तूं आसरा देखे 
तेरी हसरत अधूरी है मुझे तूं टूटता देखे 

किसी की ज़िन्दगी उनसे अधिक खुशहाल कैसे है 
बहुत से लोग हमने इसलिए भी गमजदा देखे 

मुझे साहिल मिला तो वो बहुत मायूस रहता है 
वही जिस सख्स की ख्वाहिस थी मुझे डूबता देखे 

3 comments:

  1. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (04.04.2014) को "मिथकों में प्रकृति और पृथ्वी" (चर्चा अंक-1572)" पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, वहाँ पर आपका स्वागत है, धन्यबाद।

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