Friday, 23 March 2012

पशेमान खडा था कातिल मेरा




सो जगह से चाक ये दिल मेरा

हो गया जिस्म जल थल मेरा



हम उसके शहर को छोड़ चले

लैला मेरी न महमिल मेरा



जब उठा जनाजा कंधों पर

पशेमान खडा था कातिल मेरा



क्या बंधू सफिने में बादबान

रूठा मुझ से साहिल मेरा



वो हाथ हिहाई वो पैरहन सुर्ख

कुछ एसा सजा था मकतल मेरा


From- 'Lams'

Sudheer Maurya 'sudheer'
VPO- Ganj Jalalabad, Unnao
Pin-209869
09699787634

13 comments:

  1. बहुत अच्छी प्रस्तुति!
    इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!
    आपको नव सम्वत्सर-2069 की हार्दिक शुभकामनाएँ!

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  2. नव संवत्सर का आरंभन सुख शांति समृद्धि का वाहक बने हार्दिक अभिनन्दन नव वर्ष की मंगल शुभकामनायें/ सुन्दर प्रेरक भाव में रचना बधाईयाँ जी /

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  3. बहुत सुन्दर गज़ल............
    बधाई..

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  4. सुंदर रचना...
    हार्दिक बधाईया

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  5. बढ़िया रचना भाव विह्वल करती .

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